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स्मार्ट स्कूल
आज शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिलतरा, उपरवारा, चंपारन, के बच्चे व शिक्षक बहुत खुश हैं क्योंकि उनके स्कूल का बोर्ड परीक्षा परिणाम 95 प्रतिशत आया है। भंडारपुरी का तो पूरा गांव पुलकित है क्योंकि उनके यहां 100 प्रतिशत बच्चे उत्तीर्ण  हुए हैं। ऐसी स्थिति रायपुर जिले के पचासों स्कूल में है।
अकसर पालक व बच्चे शासकीय स्कूलों में भौतिक संसाधन की कमी का जिक्र करते हैं। समृद्ध पुस्तकालय, प्रयोगशाला नहीं होता है- बच्चे कुंठित होते हैं। इन्हीं परिदृश्यों के कारण स्मार्ट स्कूल की परिकल्पना की गई। 
कम लागत में ई-क्लास, पुस्तकालय, प्रयोगशाला व नवाचार हेतु लर्निंग कार्नर बनाने का विचार आया। विचार को जिला शिक्षा अधिकारी ने कलेक्टर के समक्ष रखा। उन्हें भी यह संकल्पना अच्छी लगी और उन्होंने तत्काल सैद्धांतिक सहमति दी। 
जिले के चार विकाखण्डों के 10-10 विद्यालय जहां भवन सुविधा है- उन्हें कार्य हेतु चयनित किया गया। जिला खनिज विकास निधि से इन विद्यालयों को 1.25 लाख रू. ई-क्लास, 1 लाख रू. पुस्तकालय, 1 लाख रू. प्रयोगशाला एवं 50 हजार रू. (नवाचार) लर्निंग कार्नर हेतु कुल 3.75 लाख रूपये दिये गए। यह राशि उन्हें सितम्बर 2016 में दी गई और 60 दिनांे के भीतर कार्य पूर्ण कराने का लक्ष्य दिया गया। 
मुख्यतः ई-क्लास की अवधारणा महत्वपूर्ण है। अधिकांश स्कूलों में भौतिक, रसायन, अंग्रेजी, कामर्स, भूगोल के विषय शिक्षकों की कमी है। ऐसे में इंटरनेट का उपयोग करने विषयगत पढ़ाई बच्चे करते हैं। कक्षा 10वीं व 12वीं के लिए प्रत्येक विषक का विषयवस्तुवार अध्यापन रिकार्ड करके प्रज्ञा सी.डी. बनाई गई है। इसका उपयोग भी ई-क्लास में होता है। इसके अलावा गूगल में सर्च करके विषयगत पढ़ाई की जाती है। सामाग्री एकत्र की जाती है। अंग्रेजी सीखने में भी मदद मिल रही है। बच्चों में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए 150 से अधिक 5-5 मिनट की वैज्ञानिक लघु फिल्में भी दी गई है। इस फिल्म में वैज्ञानिक, घरेलू उपकरण कैसे तैयार कर सकते हैं, बताया जाता है। 
जिला शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में प्राचार्यों ने कमाल का ऐतिहासिक कार्य किया। अपने स्कूल को स्मार्ट बनाने न केवल शिक्षक-छात्र बल्कि पालक भी जुड़ गए। उन्होंने अपनी तरफ से भी खर्च किया।
और अब इन विद्यालयों में 50-50 हजार की बहुमूल्य पुस्तकें, रेक, सेंटर टेबल व रनिंग वाटर सुविधा युक्त लैब, लैपटाॅप व प्रोजेक्टर युक्त ई-क्लास रूम बन गए हैं। अलग-अलग विषयों के लर्निंग कार्नर भी बन गए हैं जो बहुपयोगी है। 
इन संसाधनों का शिक्षक-छात्रों ने अल्पसमय में बहुत उपयोग किया और अपने को नवीन ज्ञान से जोड़ लिया। उनके पठन-पाठन कौशल का विकास हुआ और बोर्ड परीक्षा परिणामों ने इसकी पुष्टि की। जिले के सकल शासकीय विद्यालयों का परिणाम 2016-17 में 80 प्रतिशत रहा तो वहीं 50 स्मार्ट विद्यालयों का परिणाम 88 प्रतिशत रहा है। न केवल परीक्षा परिणाम में वृद्धि हुई अपितु छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में भी 7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
फलस्वरूप 2017-18 में समस्त भवन युक्त हायर सेकेण्डरी विद्यालयों को स्मार्ट बनाने का लक्ष्य रखा गया है।